Sunday, February 12, 2012

namaskar

कोई इशारा, दिलासा न कोई वादा मगर
जब आई शाम तेरा इंतज़ार करने लगे 

aap sabhi ko mera namashkar

main dubara se blogging shuru kar raga hu

Wednesday, April 13, 2011

shayri

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हर तरफ खामोशी का साया है, जिसे चाहते थे हम वो अब पराया है,गिर पङे है हम मोहब्बत की भुख से, और लोग कहते है की पीकर आया है
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जान से भी ज्यादा उन्हे प्यार किया करते थे,याद उन्हे दिन रात किया करते थे,अब उन राहो से गुजरा नही जाता,जहा बैठ कर उनका ईँतजार किया करते थे
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प्यासे को इक कतरा पानी काफी है, ईश्क मे चार पल की जिंदगी काफी है, डुबने को समँदर मे जायेँ क्यो, उनकी पलको से टपका वो आँसु ही काफी है
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हकीकत जान लो जुदा होने से पहले, मेरी सुन लो अपनी सुनाने से पहले, ये सोच लेना भुलाने से पहले, बहुत रोई है ये आँखे मुस्कुराने से पहले

हिन्दोस्तान या हिन्द

हिन्दुस्तान (अथवा हिन्दोस्तान या हिन्द) भारत देश का कई भाषाओं में अनाधिकारिक लेकिन विख्यात नाम है , जैसे, उर्दू, हिन्दी, अरबी, फ़ारसी इत्यादि ।
आजकल अरब देशों और ईरान में "हिन्दुस्तान" शब्द भारतीय उपमहाद्वीप के लिये प्रयुक्त होता है और भारत गणराज्य को हिन्द (अरबी : अल-हिन्द) कहा जाता है ।
हिन्दुस्तान को उर्दू में हिन्दोस्तां भी लिखते हैं। जैसा कि ज़ाहिर है इस शब्द के दो हिस्से हैं एक हिन्द और दूसरा स्तान। पहले दूसरे की बात। स्तान उस भाषा समूह का शब्द है जिसे भारोपीय कहा जाता है। इसमें स्थिरता का भाव है। संस्कृत के स्थान और स्तान, दोनों के मूल में स्था धातु है। इस स्था धातु के दर्शन अंग्रेज़ी के स्टेशन और स्टैण्ड में भी होते हैं। अंग्रेज़ी या योरोपीय भाषाओं में इस धातु का प्रयोग बड़े भौगोलिक हिस्से की संज्ञा बनाने में नहीं होता। संस्कृत या भारतीय परम्परा में भी जनस्थान या देवस्थान जैसे शब्द आते हैं मगर किसी देश या प्रदेश को चिह्नित करने के लिए इस धातु का प्रयोग नहीं देखा जाता। जबकि फ़ारसी और दूसरी मध्येशियाई भाषाओं ने इस धातु का इस अर्थ में व्यापक इस्तेमाल किया है। जिसके चलते तुर्किस्तान, तुर्कमेनिस्तान, कज़ाकिस्तान, ताज़िकस्तान, उज़बेकिस्तान और अफ़ग़ानिस्तान आदि नाम सामने आए।
अब हिन्दोस्तां शब्द का पहला हिस्सा- हिन्द। संस्कृत के किसी प्राचीन ग्रंथ में यह शब्द नहीं मिलता। हम जिसे अपना देश जानते हैं उस भौगोलिक प्रदेश की संज्ञा जम्बूद्वीप या भारतवर्ष मिलती है। अगर किसी संस्कृत श्लोक में यह शब्द आया है तो उसे इस शब्द की प्राचीनता का प्रमाण मान लेना, सिर्फ़ इस आधार पर कि श्लोक की भाषा संस्कृत है, बचकाना निष्कर्ष है। वैसे भी हिन्दोस्तां का अर्थ पूरा भारत देश नहीं रहा है। उसका अर्थ सिर्फ़ पंजाब और बंगाल को निकालने के बाद जो उत्तर भारत का हिस्सा बचता है, वही रहा है। १८५७ तक महाराष्ट्र के लोग जब ग्वालियर-झांसी जाते थे तो कहते कि हिन्दोस्तां जा रहे हैं।
इस हिन्द शब्द की निश्चित रिश्तेदारी सिन्धु नदी से है। सिकन्दर जब भारत आया तो सिन्धु पार करके ही लौट गया। तब से यूनान में इस देश की संज्ञा इण्डिया हो गयी- सिन्धु का इण्ड हो कर। अरब देशों का नाता भारत से पुराना है- इस्लामी संस्कृति से भी पुराना। मगर वे तब हमें किस नाम से जानते थे, इसके प्रमाण नहीं है। पर इस्लाम आने के बाद अरब और तुर्की में सिन्द और हिन्द दोनों के स्वतंत्र अस्तित्व की जानकारी उनके पास थी। १३वीं सदी के सूफ़ी जलालुद्दीन रूमी ने एक जगह लिखा है;
हिन्दुओं के वास्ते है सही हिन्दी तरीक़ा सिन्धियों के वास्ते है सही सिन्धी सलीक़ा
[यहाँ हिन्दू का अर्थ हिन्द के वासी ही है। बाद में भी जब मुसलमानों की ज़ुबान से हिन्दू शब्द प्रचलित हुआ तो उसका अर्थ भारत में रहने वाले सभी ग़ैर-मुस्लिम ही था।]
ये तो साफ़ है कि हिन्द का सम्बन्ध सिन्ध से ही है मगर ये कब और कैसे अलग- अलग हुए, यह नहीं कहा जा सकता। सम्भव है यूनानियों के इण्डिया को उन्होने हिन्द के बतौर क़बूल किया हो। मगर ये बात पक्की तौर नहीं कही जा सकती।

अच्छा तुम्हारे शहर का दस्तूर हो गया

अच्छा तुम्हारे शहर का दस्तूर हो गया
जिसको गले लगा लिया वो दूर हो गया

कागज में दब के मर गए कीड़े किताब के
दीवाना बे पढ़े-लिखे मशहूर हो गया

महलों में हमने कितने सितारे सजा दिये
लेकिन ज़मीं से चाँद बहुत दूर हो गया

तन्हाइयों ने तोड़ दी हम दोनों की अना
आईना बात करने पे मज़बूर हो गया

सुब्हे-विसाल पूछ रही है अज़ब सवाल
वो पास आ गया कि बहुत दूर हो गया

कुछ फल जरूर आयेंगे रोटी के पेड़ में
जिस दिन तेरा मतालबा मंज़ूर हो गया

“अनेकता में एकता” वाली बात जो हमेशा से ही भारत के लिए पहचान है .

“अनेकता में एकता” वाली बात जो हमेशा से ही भारत के लिए पहचान है .

आरएसएस फीड पर एक संक्षिप्त नोट:

आरएसएस फ़ीड आपकी मनपसंद वेबसाइट से ताज़ा जानकारी और ख़बरें प्राप्त करने का आसान तरीका है| रियल सिंपल सिंडिकेशन का संक्षिप्त रूप है आरएसएस. वेबसाईट के किसी भी पन्ने पर जैसे ही कोई बदलाव होगा या फिर पोस्ट आएगी, आरएसएस न्यूज़ फ़ीड के ज़रिए इसकी एक प्रति आपके आरएसएस न्यूज़ रीडर तक पहुँच जाएगी.
http://www.tejari.com/app_themes/images/rss_logo.jpgतो अब आप जान ही गए होंगें कि आरएसएस फीड किसी भी साईट के मालिक और पाठकों के लिए कितना सुविधाजनक है | और हम सबसे चाहते ब्लॉग अग्रिग्रेटर (जैसे चिट्ठाजगत) जैसी साईट भी आरएसएस फीड के जरिये ही आपकी नयी पोस्ट के बारे सबको सूचित कराती हैं  |
आप गूगल रीडर के माध्यम से फीड को पढ़ सकते है |
चलो यहाँ हम चर्चा करते है कि हम इन आरएसएस फीड के साथ क्या क्या कर सकते है | जैसे किसी पसंदीदा फीड को आप पीडीएफ फाईल के रूप में अपने पास रखना चाहते हों, या फिर अपना कोई आरएसएस अग्रिग्रेटर, या फीड की जानकारी ई-मेल से, या फीड को अपने मोबाइल से पढाना चाहते है …..और भी बहुत कुछ …
इतने सारे काम के लिए बस सिर्फ एक टूल ..वो भी फ्री…और ऑनलाइन …कोई सोफ्टवेयर की जरूरत नहीं …

रेल प्रशासन

रेल प्रशासन की अनसुलझी पहेलिया आज भारत आज़ाद हुए ६० साल हो गये. आप को प्रशन नही हुवा है की आज भारत मे लोक शाही चल र्ही है तो फिर रेल मे प्रथम श्रेणी ओर द्रितीय श्रेणी असे वर्ग क्यो राखे गये है. लोकसाही मे तो सभी समान है तो यह केसी विसन्ग्तत क्यो है क्या यह विसनगतता हमारे बंधारण मॅ किस कॉलम मे दी गई है ? तो इस का अर्थ है की सरकारको ही पता नही है की हमारा बंधारण सब नागरिक को समान अधिकार देती है तो आज अएसे दनिक ओर ग़रीब के बीच यह केशा फ़र्क सरकारी सेवा मे दिया गया है ?///

Monday, April 11, 2011

my city

Lucknow is the capital city of Uttar Pradesh, the most populous state of India. Lucknow had a population of 3,647,834 in 2001.The expected population of Lucknow in 2009 is more than 50 lakhs. Lucknow is a second largest city after Delhi within the states of north,central and eastern India. Lucknow is also the administrative headquarters of Lucknow District and Lucknow Division. According to Government of India, the Lucknow district is one of the ninety Minority Concentrated Districts in India, shown by 2001 census data on population, socio-economic indicators and basic amenities indicators.[1]
Located in what was historically known as the Awadh region, Lucknow has always been a multicultural city. Courtly manners, beautiful gardens, poetry, music, and fine cuisine patronized by the Persian-loving Shia Nawabs of the city are well known amongst Indians and students of South Asian culture and history. Lucknow is popularly known as the The City of Nawabs. It is also known as the Golden City of the East, Shiraz-i-Hind and The Constantinople of India.

school

लौट जाती है दुनीया गम हमारा देखकर,

जैसे लौट जाती है लहरें किनारा देखकर,

तु कंधा ना देना मेरे जनाजे को..

कहीं फिर से ज़िन्दा ना हो जाऊँ तेरा सहारा देखकर..

to all my bloggars

लौट जाती है दुनीया गम हमारा देखकर,

जैसे लौट जाती है लहरें किनारा देखकर,

तु कंधा ना देना मेरे जनाजे को..

कहीं फिर से ज़िन्दा ना हो जाऊँ तेरा सहारा देखकर..

yaad

जान से भी ज्यादा उन्हे प्यार किया करते थे,याद उन्हे दिन रात किया करते थे,अब उन राहो से गुजरा नही जाता,जहा बैठ कर उनका ईँतजार किया करते थे